मैं ही अच्छा था

मैं ही अच्छा था💫


शायद मैं ही अच्छा था |

मैं ही था जो तेरे बेरंग जीवन को रंगीन बनाना चाहता था |

मैं ही था जो तुझे खुश देखना चाहता था |

मैं ही था जो तुझे कांटों पर चलते देख रोकना चाहता था |

अंधेरे में जाता देख टोकना चाहता था |

सितारों की महफ़िल में देखना चाहता था |

इन दिनों मैं सोचता था मैं सच्चा हूँ |

पर मैं तो ग़लत था |

क्यूंकि जिन रंगों की मैं बात कर रहा हूँ ,

उसका इंद्रधनुष है तू |

जिस ख़ुशी की मैं बात कर रहा हूँ ,उसकी मुस्कान है तू |

जिन कांटों की मैं बात कर रहा हूँ , उसका गुलाब है तू |

जिस अंधेरे का मैं बात कर रहा हूँ , उसकी रोशनी है तू |

जिस महफ़िल का मैं बात कर रहा हूँ , उसका चाँद है तू |

इन सब के बावजूद मैं सोचता हूँ,  मैं सच्चा था |

क्यूंकि शायद मैं ही अच्छा था |

मैं ही अच्छा था ||

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